Book review Anne Frank ki dairy
विश्व प्रसिद्ध पुस्तक 'एनी फ्रैंक की डायरी' पढ़ लिया, जो कुछ भी थोड़ा बहुत समझ में आया उसे साझा कर रहा हूं आशा हैं विश्व शांति का संदेश फैलाने में यह नोट काम आए -
यह एक 13 वर्ष के लड़की की डायरी है तो स्वाभाविक सी बात है कि इसमें प्रत्येक दिन का विवरण बहुत अधिक है हालांकि इससे योरोपीय समाज को समझने में काफी मदद मिलती है। इस डायरी में दो कथाएं साथ-साथ चलती है एक तो जर्मनों का यहुदियों पर यातना की कहानी। दूसरी एनी और पीटर की प्रेम कहानी।
@ बच्चों के प्रेम में दादा -दादी और मां का विरोध भी शामिल है लेकिन एनी यह मानती है कि प्रेम और युद्ध में सब चलता है। भूमिगत रहते हुए भी एनी के परिवार में पढ़ने का खूब शौक है सभी सदस्य चाहे ओ बच्चे हों या बुढ़े सब लोग अच्छी किताबें पढ़ते रहते हैं।
@ एनी जैसे-जैसे बड़ी हो रही है उसके अंदर शारीरिक परिवर्तन हो रहा है जो कि उसके भावनाओं को बढ़ा देता है। कहा जाता है कि स्त्री एक ऐसी लता है जो अपने पास की बेल से ही लिपटती है। एनी भी सेक्स आदि के बारे में कुछ पढ़ कर और कुछ अनुभव से बहुत कुछ जान लेती है और इसका प्रयोग वह पीटर पर करती है। पीटर बहुत ही शर्मिला लड़का है वह सेक्स आदि के बारे में कुछ नहीं जानता। एनी चाहती है कि हर एक मां बाप को अपने बच्चों के साथ दोस्ताना संबंध रखते हुए उन्हें यौन शिक्षा की भी जानकारी देनी चाहिए।
@ प्यार को परिभाषित करते हुए एनी कहती है कि - प्यार किसी को समझना, उसकी देखभाल, अपने सुख-दुख बांटना है। इसमें अंततः शारीरिक प्यार भी शामिल होता है। आप कुछ साझा करते हैं, कुछ चीजें देते हैं और बदले में कुछ प्राप्त करते हैं, चाहे आप शादी करें या न करें, चाहे आपको एक बच्चा हो या न हो। आपके पुण्य प्रताप के खोने से कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक आप जानते हैं कि जब तक आप जीवित है कोई आपकी तरफ रहेगा, जो आपको समझता है, और जो किसी और के साथ साझा नहीं करेगा।
एनी शादी को पवित्र बंधन नहीं मानती, वह इसे आदमी का एक अनुभव मानती है।
@ एनी कहती हैं कि - दुनिया में सभी पीड़ा के बारे में सोचो और आभार करो कि आप इसका हिस्सा नहीं हो। मेरी सलाह होती है कि बाहर खुले देहात में जाओ, धूप और प्रकृति के पास जो भी देने के लिए है, उसका आनंद लो। बाहर जाओ और अपने भीतर की खुशी फिर से ग्रहण करने की कोशिश करो। अपने आप में और आपके आसपास हर चीज में सौंदर्य के बारे में सोचो और खुश रहो।
@ पुरुष -महिला असमानता पर एनी का विचार है कि - शायद पुरुष अपनी अधिक से अधिक शारीरिक शक्ति के कारण शुरू से ही महिलाओं पर हावी रहे हैं, पुरुष हैं जो जीविका कमाते हैं, बच्चे उत्पन्न करते हैं और वह करते हैं जो उन्हें पसंद है। महिलाएं बेवकूफ थी जो चुपचाप ये सब सहती रहीं । सौभाग्य से शिक्षा, काम और प्रगति ने महिलाओं की आंखें खोल दी हैं । कई देशों में उन्हें समान अधिकार प्राप्त हुआ है। आधुनिक महिलाएं पूरी तरह से स्वतंत्र होने का अधिकार चाहतीं हैं। सैनिकों और युद्ध के नायकों को सम्मानित किया जाता है, शहीदों को आदर दिया जाता है लेकिन कितने लोग महिलाओं को भी सैनिक के रूप में देखते हैं।
@ अपने मां के व्यवहार से एनी बहुत खुश नहीं है, वह कहती है कि वह मेरे लिए एक मां नहीं है - मुझे खुद मां की तरह अपनी देखभाल करनी है। इस प्रकार से मां को मार डालने तक का भी विचार उसके मन में आता है हालांकि बाद में वह इसे सही कर लेती है और अपने अपरिपक्व मस्तिष्क का हवाला देकर वह मां से माफी भी मांगती है और यह स्वीकार करती है कि शायद मैं मां को समझ नहीं पाती।
* द्वितीय विश्व युद्ध का वर्णन करते हुए वह लिखती है कि - शाम को जब अंधेरा होता है मैं अक्सर रोते हुए बच्चों के साथ अच्छे निर्दोष लोगों की लम्बी कतारें देखती हूं। लगातार चलते हुए मुट्ठी भर लोगों को आदेश चलाते हुए, जो उन्हें धमकाते हैं और तब तक पीटते हैं जब तक कि ओ लगभग गिरने वाले नहीं हो जाते। किसी को बख्शा नहीं जाता है। बीमार, बुजुर्ग, बच्चे, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं - सबको उनकी मौत तक चलाया जाता है। और यह सब इसलिए क्योंकि वे यहूदी हैं।
युद्ध में भयानक घटनाएं हो रही हैं गरीब असहाय लोगों को घर से बाहर निकाला जा रहा है और अपने साथ कुछ नकदी और पिट्ठू बैग लेने की बस अनुमति नहीं। और फिर रास्ते में उनकी उस सम्पत्तियों को लुटवा भी दिया जाता है। परिवारों की धज्जियां उड़ाई जा रही है पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को अलग कर दिया जाता है। बच्चे विद्यालय से घर आते हैं और अपने माता-पिता को गायब पाते हैं। हालैंड में ईसाई भी डर में जी रहे हैं क्योंकि उनके बेटों को जर्मनी भेजा जा रहा है हर कोई डरा हुआ है । बम बरसाए जा रहें हैं यातना गृह में लोग मारे जा रहे हैं, बम बरसाए जा रहे हैं। लोगों को गैस चैम्बर में मारा जा रहा है बहुत ही भयावह स्थिति है।
युद्ध के कारण चोरी की घटनाएं बढ़ गयीं हैं। पर्याप्त राशन नहीं मिल पा रहा है, बच्चे बीमार और कुपोषण के शिकार हो रहे हैं।
@ एनी कहती हैं कि युद्ध क्यों, क्यों लोग एक साथ शांति से नहीं रह सकते? यह सब विनाश क्यों?
क्यों युद्ध पर प्रत्येक दिन लाखों खर्च किए जा रहे हैं, जबकि चिकित्सा विज्ञान, कलाकारों, गरीबों के लिए एक पैसा भी उपलब्ध नहीं है?
लोगों को भोजन के लिए भूखे क्यों रहना पड़ता है जबकि दुनिया के अन्य भागों में भोजन के पहाड़ सड़ रहे हैं। ओह!लोग इतने पागल क्यों हैं? 

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