Book review: coolie
इस उपन्यास का मुख्य पात्र मुन्नू है, बेचारा बचपन में ही मां बाप को खो देता है। चाचा दयाराम इम्पीरियल बैंक-शामनगर का चपरासी है। चाची तो कर्कशा नारी है, दिनभर डांटती फटकारती रहती है। बेचारा ग्रामीण पहाड़ी लड़का न मां का प्यार पाया न बाबू जी का दुलार 5तक ही पढ़ाई कर पाया था कि चाचा ने किसी साहब के यहां नौकर रखवा दिया। घर से शामनगर तक उसका चाचा उसे बड़ी ही बेरहमी से मारते पीटते पैदल लेकर गया और साहब के यहां नौकर का काम दिला दिया। थका हारा मुन्नू न आराम कर पाया न कुछ खा पाया कि बीबी जी के आर्डर पर काम में लग गया। उसके मन में यह भाव आया कि कितने बेरहम होते हैं शहरी, एक गिलास पानी तक भी नहीं पुछते। मुन्नू को शहर की चीजें आकर्षित करती हैं वह चाहता है कि साहब जैसा जूता हमें भी मिल जाता। पाखाना से परिचित नहीं था बेचारा साहब की बाउंड्री में ही शौच कर दिया मालकिन ने बहुत डांटा सभी ने मजाक बनाया पर क्या करता बेचारा एक मज़दूर की औकात ही क्या है उन लोगों के आगे। चोरी छुपे साहब लोग की विलासिता भी देखता है। साहब की लड़की शीला पर मोहित भी हो जाता है बंदर का नाच दिखाते हुए आवेश में आकर उसका गाल काट लेता है। बीबी जी से मार पड़ती है फिर एक दिन चोरी से भाग जाता है। किसी तरह भागकर एक ट्रेन में चढ़ जाता है जहां उसे दौलतपुर के अचार मिल के मालिक प्रभु दयाल और उनका साथी गनपत मिल जाते है। प्रभु और उनके पत्नी का प्रेम पाकर मुन्नू मिल में काम करने लगता है। ऐयाश गनपत की वजह से मिल टूट जाती है और वह गल्ला मंडी में कुली का काम करता है, बोझा न उठा पाने के कारण सब्जी मंडी में काम करता है पर ज्यादा पैसा न मिलने के कारण वह बंबई जाने की सोचता है। सर्कस के महावत की मदद से मुम्बई पहुंच जाता है। मुंबई में उसे हरि मिल जाता है। उसके साथ काटन फैक्ट्री में काम करने लगता है। कुली लोग जितने पैसे कमाते हैं उतना साहबों का ब्याज चुकाने में रह जाते हैं। फैक्ट्री में मजदूरों का चौतरफ़ा शोषण किया जाता है। मुन्नू रतन पहलवान से दोस्ती करता है। रतन मज़दूर यूनियन का सदस्य होता है जिसकी वजह से मिल मालिक उसके पैसे नहीं काटते। मुन्नू को यूनियन की ताकत का पता चलता है,सभी मजदूर इकट्ठा होकर हक की लड़ाई लड़ना सीख जाते हैं। यूनियन के नेता जबरदस्त भाषण देते है और सभी मजदूर हड़ताल करने का निर्णय लेते हैं तभी अंग्रेजों ने अपने पिट्ठू पठानों का इस्तेमाल कर सभा में ही अफवाह फैला देते हैं कि मुसलमान हिन्दूओं के लड़कों का अपहरण कर ले रहे हैं खबर सुनते ही कई हिंदू मजदूर रोने-धोने लगते हैं, रतन मंच से अपील करता है कि यह अफवाह है सभी लोग घर जाओ लेकिन कोई नहीं सुनता है। सभा में ही पठान और हिन्दू मजदूर लड़ जाते हैं भगदड़ मच जाती है। मुन्नू किसी तरह जान बचाकर भागता है, इसी दौरान उसका एक्सीडेंट हो जाता है। एक्सीडेंट करने वाली मेमसाब को उस पर दया आ जाती है और वह उसका इलाज करवाती है। इस तरह मुन्नू मेमसाब के साथ शिमला पहुंच जाता है वहां उसे मेम का प्यार मिलता है। कुली का काम करते हुए उसे टी.बी. हो जाती है और एक दिन खून की उल्टी करके मुन्नू मर जाता है। इसी तरह एक कुली जीवनभर कठिन परिश्रम करके कमाता है और शोषण के जाल में फंसकर मर जाता है। यही होता है एक मजदूर कुली का जीवन।

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