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Showing posts from February, 2024

Book review: Kitne pakistan

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 कमलेश्वर का यह उपन्यास उपन्यास के क्षेत्र में एक अलग शैली का उपन्यास है, एक तरह से कहिए कि एक अनोखा प्रयोग है। उपन्यास की शुरुआत विद्या और अदीब के अधूरे प्रेम कहानी से होती है जो डूबते उतारते अंत तक चलती रहती है। लेकिन इसके बाद अदीब की अदालत शुरू हो जाती है अर्दली महमूद ने बारी-बारी से समय, इतिहास, भूगोल, दुनिया की सभी प्राचीन सभ्यताओं, बाबर से औरंगजेब तक के सभी बादशाहों, हिंदू राजपूतों, अंग्रेज शासकों, लेखकों, वैज्ञानिकों, राष्ट्राध्यक्षों आदि के मृत आत्माओं को अदीब की अदालत में पेश करता है। ज़िरह होती है सभी अपने किए  को उजागर करते हैं और पश्चाताप भी करते हैं। इसमें बहुत सारे तथ्य पाठक को सोचने पर मजबूर करते हैं। सत्ता और स्वार्थ में सब धोखेबाज हैं जो अपना वर्चस्व खोना नहीं चाहते। इसके चक्कर में तबाही झेली है आम जनता। पूरे विश्व में धर्म और विश्वास के नाम पर लोगों को बांटा और लड़ाया जा रहा है। हर जगह धर्मांधता का परिणाम बुरा हुआ है। धर्म में बहुत ज्यादा घुसना आम जन के लिए फायदेमंद नहीं है। धर्म और नफ़रत के आधार पर कितने पाकिस्तान बनाओगे? सभ्यता के नाम पर सभ्य नागरिक का चोला...

Book review: coolie

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 इस उपन्यास का मुख्य पात्र मुन्नू है, बेचारा बचपन में ही मां बाप को खो देता है। चाचा दयाराम इम्पीरियल बैंक-शामनगर का चपरासी है। चाची तो कर्कशा नारी है, दिनभर डांटती फटकारती रहती है। बेचारा ग्रामीण पहाड़ी लड़का न मां का प्यार पाया न बाबू जी का दुलार 5तक ही पढ़ाई कर पाया था कि चाचा ने किसी साहब के यहां नौकर रखवा दिया। घर से शामनगर तक उसका चाचा उसे बड़ी ही बेरहमी से मारते पीटते पैदल लेकर गया और साहब के यहां नौकर का काम दिला दिया। थका हारा मुन्नू न आराम कर पाया न कुछ खा पाया कि बीबी जी के आर्डर पर काम में लग गया। उसके मन में यह भाव आया कि कितने बेरहम होते हैं शहरी, एक गिलास पानी तक भी नहीं पुछते। मुन्नू को शहर की चीजें आकर्षित करती हैं वह चाहता है कि साहब जैसा जूता हमें भी मिल जाता। पाखाना से परिचित नहीं था बेचारा साहब की बाउंड्री में ही शौच कर दिया मालकिन ने बहुत डांटा सभी ने मजाक बनाया पर क्या करता बेचारा एक मज़दूर की औकात ही क्या है उन लोगों के आगे। चोरी छुपे साहब लोग की विलासिता भी देखता है। साहब की लड़की शीला पर मोहित भी हो जाता है बंदर का नाच दिखाते हुए आवेश में आकर उसका गाल काट ...

Book review Anne Frank ki dairy

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 विश्व प्रसिद्ध पुस्तक 'एनी फ्रैंक की डायरी' पढ़ लिया, जो कुछ भी थोड़ा बहुत समझ में आया उसे साझा कर रहा हूं आशा हैं विश्व शांति का संदेश फैलाने में यह नोट काम आए - यह एक 13 वर्ष के लड़की की डायरी है तो स्वाभाविक सी बात है कि इसमें प्रत्येक दिन का विवरण बहुत अधिक है हालांकि इससे योरोपीय समाज को समझने में काफी मदद मिलती है। इस डायरी में दो कथाएं साथ-साथ चलती है एक तो जर्मनों का यहुदियों पर यातना की कहानी। दूसरी एनी और पीटर की प्रेम कहानी।  @ बच्चों के प्रेम में दादा -दादी और मां का विरोध भी शामिल है लेकिन एनी यह मानती है कि प्रेम और युद्ध में सब चलता है। भूमिगत रहते हुए भी एनी के परिवार में पढ़ने का खूब शौक है सभी सदस्य चाहे ओ बच्चे हों या बुढ़े सब लोग अच्छी किताबें पढ़ते रहते हैं।  @ एनी जैसे-जैसे बड़ी हो रही है उसके अंदर शारीरिक परिवर्तन हो रहा है जो कि उसके भावनाओं को बढ़ा देता है। कहा जाता है कि स्त्री एक ऐसी लता है जो अपने पास की बेल से ही लिपटती है। एनी भी सेक्स आदि के बारे में कुछ पढ़ कर और कुछ अनुभव से बहुत कुछ जान लेती है और इसका प्रयोग वह पीटर पर करती है। पीटर बहु...

Book review : My experiments with truth

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 गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के मेरे प्रयोग' को पढ़ते हुए जो थोड़ी बहुत समझ बनी उसे संक्षेप में व्यक्त करने की कोशिश कर रहा हूं - * गांधी जी एक सामान्य विद्यार्थी थे लेकिन उनके संघर्ष, सिद्धांत,माता-पिता के संस्कार,कर्म और अच्छे लोगों का साथ  ने उन्हें महान बनाया। *गांधी जी अपने परिवारिक परिवेश जुड़े हुए एक धार्मिक व्यक्ति थे और धार्मिक सद्भावना को बढ़ावा देते हुए सभी धर्मों की अच्छी बात को अपनाते थे। इस आत्मकथा में उन्होंने सबसे कड़ी निन्दा ईसाई धर्म की किया है। *एक जगह उन्होंने बताया है कि बिगड़े हुए दोस्त को सुधारने के लिए लोगों के विरोध के बावजूद भी हमने उससे दोस्ती बनाए रखी कि उसे सुधार दूंगा पर वह सुधरा नहीं और इन्हें ही ग़लत आदतों को सीखा दिया। * गांधी जी माता पिता की सेवा को परम धर्म मानते थे लेकिन वासना के कारण अंतिम समय में पिता से बात नहीं कर पाए इसका पश्चाताप उन्हें आजीवन रहा। * गांधी जी विलायत जाकर शाकाहार और मांसाहार में दुविधाग्रस्त जरुर हुए, संगति और वातावरण के प्रभाव में चोरी छुपे अंडे खाकर माता के वचन को तोड़े और बहुत पछताए लेकिन अंततः शाकाहार पर दृढ़ रहे। *यह ...